शराबी पति और गंगा की कहानी | Story In Hindi | कहानी हिंदी में

शराबी पति और गंगा की कहानी | Story In Hindi | एक शराबी पति और बेचारी  पत्नी की कहानी 

 


ये कहानी एक परिवारी काल्पनिक कहानी हैं जिसमे आपको एक औरत की कहानी दिखाई गई जिसके पति अबौत बड़ा दारूबाज होता हैं और वे दारू पेक अपने पत्नी को मारता

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पीटता रहता हैं। फिर एक दिन वह औरत परेशान होकर घर से भाग जाती हैं । और किसे अपने छोटे से बच्चे को कैसे पल पोस्टर बड़ा करती हैं देखिए । कहानी हिंदी में

शराबी पति और गंगा की कहानी | Story In Hindi|एक शराबी पति और बेचारी  पत्नी की कहानी 



केशव और गंगा की शादी को चार साल हो चुका था ।लेकिन अभी भी उन दोनों में तनिक भर नही पटती थी। और इसका कारण या हैं की । केशव  एक प्रोफेसनल दारू बाज था । केशव रोज दारू पि कर दारू के नशे में होकर घर आता था और फिर घर आने के बाद अपने पत्नी यानी कि गंगा बहुत मरता पीटता था इसी चीज को देख के केशव का बेटा केशव से डरने लगे था । जब रोज रोज केशव गंगा को मारता था तो फिर एक दिन गंगा परेश होकर अपने पिता को बुलाती हैं अपने घर।कहानी हिंदी में

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अपने पिता को सारी बात गंगा बताती हैं और अपने पिता को घर बुलाती हैं  और उसके पिता मधुकर गंगा के घर आते है मदुकर के घर आने के कुछ देर बाद केशव फिर नशे में धूत होकर घर आता हैं और जब केशव घर आता हैं तो दोनों में बात चीत चालू होती हैं । बात करते करते केशव नशे में होने के कारण गंगा को मदुकर के सामने ही मारने लगता हैं जिसे देखेकर मधुकर गुस्सा हो जाता हैं वो बोलता हैं कि क्यों मरते हो । तो केशव बोलता हैं कि मेरी पत्नी हैं में मरु चाहे जो कारों तुम्हारा क्या जाता हैं तुम को होते हो । तो मदुकर बोलता हैं आप यह जान लो कि अगर मैं में अपने बेटी गंगा की शादी आप से कर दी मेरे सारे अधिकार गंगा पे से हट जाते हैं ।कहानी हिंदी में


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वो मेरी अभी भी बेटी हैं । और तुम इसे  मत मारो तो केशव  बोलता हैं कि अगर ये तुम्हारी बेटी हैं तो उसे अपने साथ ले जाओ फिर मदुकर अपने बेटी को लेके अपने घर चला आता हैं।  मदुकर एक गांव में रहता हैं और उसके पास एक बगीचा हैं जिससे कमाता हैं और घर खर्च निकाल हैं और यह गंगा का बेटा अपने घर पहुचकर बहुत खुश था ।और वही गंगा अपने पिता के घर खर्च बढ़ने के कारण परेशान थी । कहानी हिंदी में


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लेकिन धीरे समय बीतता चला जाता हैं और मधुकर अपने बगीचे को आने नाती के साथ संभलने लगा उर वे लोगे दिन उसी बगीचे बैठें  जाते रहत थे । वही दूसरी तरफ गंगा घर के कामो में व्यस्त रहती थी । शाम होने को आया था तो गंगा दोनों के लिए चाय बना के लाती हैं और दोनों लोग को चाय देती हैं । और अपने चाय लेके पीने लगती हैं तभी मदुकर कहता हैं गंगा से की बेटी बहुत दिन हो गया तेरे हाथ के आम की चटनी खाय की दिन हो गए । आज तुम आम की चटनी बना के लेक तो गंगा आम की चटनी बनाने चली जाती हैं । तब मधुकर के कुछ दोस्त आ जाते हैं तब  मधुकर उनको चाय परोता हैं । उसके बाद गंगा चटनी बना के लेके आती हैं और सबको देती चटनी खाने के बाद सभी लोग चटनी के प्रसंसा करने लगते हैं । कहानी हिंदी में


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और कहते हैं की अगर आप इसे बाजार में बेचोगे तो बहुत  पैसे कमाओगे ये गंगा के मन में बैठ गयी और अगले दिन गंगा इसके बारे में अपने पिता से बात की गंगा के पिता भी चाहते थे कि गंगा जो करना चाहे वो करे फिर अगले दिन गंगा खूब सारे आम की चटनी बना कर बेचने लगती हैं और कुछ ही दिन में गंगा की दुकान चल पड़ती हैं । गंगा अच्छे से जीवन व्यतीत करने लगती हैं । और अब मधुकर गंगा के बेटे को संभलने लगता हैं । अब गमधुकर की बेटी को यानी गंगा को उसके दारू बाज़  पति  यानी कि केसव की कोई जरूरत नही । सही कहा था गंगा के पिता यानी कि मधुकर ने की बेटियां बोझ नही होती बल्कि वह घर की लकमी होती हैं । कहानी हिंदी में

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